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  • Sunday, 20 September 2026
AI की एक गलती ने बढ़ा दिया परमाणु युद्ध का खतरा

AI की एक गलती ने बढ़ा दिया परमाणु युद्ध का खतरा

वाशिंगटन| एक गलत एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) रिपोर्ट ने अमेरिका और चीन को युद्ध के बेहद करीब पहुंचा दिया था। इस साल ईरान के साथ चल रहे युद्ध (काल्पनिक संदर्भ) के दौरान, अमेरिकी सेना को एक खुफिया रिपोर्ट मिली थी जिसमें दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया में मौजूद एक चीनी जहाज परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े संवेदनशील सामान को ले जा रहा है। रिपोर्ट मिलते ही अमेरिकी सेना ने जहाज को रोकने और उस पर हमला करने की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन कार्रवाई से ठीक पहले अधिकारियों ने रिपोर्ट की दोबारा जांच की तो पता चला कि इसकी अहम जानकारी एक एआई चैटबॉट की गलती पर आधारित थी।


मामला इसलिए बेहद गंभीर था क्योंकि जहाज चीन का था। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैनिक उसे रोककर जहाज पर चढ़ने की तैयारी कर रहे थे और सैन्य विमान भी हवा में पहुंच चुके थे। अगर चीनी जहाज के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई शुरू हो जाती, तो यह सिर्फ एक जहाज को रोकने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे अमेरिका और चीन के बीच सीधा टकराव पैदा होने का गंभीर खतरा था। हालांकि यह पता नहीं चल पाया कि आखिर जहाज पर कौन सा सामान था और वह कहां से कहां जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह खुफिया रिपोर्ट अमेरिकी सेना में बड़े पैमाने पर पहुंचाई गई थी। रिपोर्ट तैयार करने वाले एक विश्लेषक ने जहाज के माल से जुड़ी खुफिया जानकारी को समझने के लिए एआई चैटबॉट की मदद ली थी। चैटबॉट ने जहाज में मौजूद सामग्री की पहचान गलत कर दी। इसके बाद एआई से मिली जानकारी को एक सामान्य खुफिया आकलन की शक्ल दी गई और उसे सैन्य अधिकारियों तक पहुंचाया गया।

यहीं से सवाल उठता है कि मिलिट्री के संवेदनशील फैसलों में एआई की भूमिका कितनी सुरक्षित है। एक सूत्र ने रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि इसने ‘लगभग युद्ध शुरू कर दिया था।’ विश्लेषक ने एआई सिस्टम के जरिए सार्वजनिक स्रोतों से मिली जानकारी और सरकार के पास मौजूद गोपनीय खुफिया जानकारी को मिलाकर जहाज के माल के बारे में निष्कर्ष निकाला था। यह साफ नहीं है कि इस्तेमाल किया गया चैटबॉट किसी निजी कंपनी का था या अमेरिकी सरकार का अपना सिस्टम। मशीनें तेजी से हजारों सूचनाओं को जोड़ सकती हैं, लेकिन वे गलत जानकारी को भी इस आत्मविश्वास के साथ पेश कर सकती हैं, जैसे वह एकदम सच हो। यह घटना भविष्य में सैन्य और खुफिया निर्णय लेने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जुड़ी गंभीर चुनौतियों और जोखिमों को उजागर करती है। ड्रोन युद्ध अब अलग-अलग हथियारों की लड़ाई नहीं रह गया है, यह सेंसर, सॉफ्टवेयर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तेज प्रतिक्रिया का पूरा खेल बन चुका है।

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