
2012 से पहले बने वाहनों पर E20 का इस्तेमाल नुकसानदेह
नई दिल्ली। अप्रैल 2023 के बाद बनी गाड़ियां ई20 पर बिना किसी समस्या के चल सकती हैं क्योंकि उनके इंजन इसी के लिए डिजाइन किए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 2012 से 2023 के बीच बनी गाड़ियों के लिए ई10 तक का ईंधन ही सुरक्षित है, जबकि 2012 से पहले बने वाहनों पर ई20 का इस्तेमाल नुकसानदेह हो सकता है। माइलेज पर असर को लेकर भी चर्चा है। कुछ वाहन मालिकों का दावा है कि ई20 से माइलेज 15-20 प्रतिशत तक घटता है, लेकिन ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि वास्तविक कमी सिर्फ 1-6 प्रतिशत के बीच होती है। यानी असर तो है, लेकिन उतना बड़ा नहीं जितना बताया जा रहा है। लंबे समय में यह ईंधन इंजन पर असर डाल सकता है। इथेनॉल रबर और प्लास्टिक पार्ट्स को नुकसान पहुंचा सकता है, पाइप और गास्केट सख्त होकर टूट सकते हैं और नमी खींचने के कारण इंजन के धातु वाले हिस्सों में जंग लग सकती है।
कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि अगर गाड़ी ई20-सपोर्ट नहीं करती और फिर भी इस ईंधन का उपयोग किया गया तो वारंटी अमान्य हो सकती है। ऐसे में वाहन मालिकों को चाहिए कि वे अपनी गाड़ी का यूज़र मैनुअल देखें या कंपनी से जानकारी लें। साफ है कि ई20 पेट्रोल पर्यावरण और देश की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद कदम है, लेकिन यह हर गाड़ी के लिए उपयुक्त नहीं। नई गाड़ियों के मालिक निश्चिंत होकर इसका उपयोग कर सकते हैं, जबकि पुराने वाहन चालकों को सतर्क रहना जरूरी है। बता दें कि भारत सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाकर ई20 ईंधन उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और विदेशी तेल पर निर्भरता घटाना है। हालांकि, वाहन मालिकों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह नया ईंधन उनकी गाड़ियों के लिए सुरक्षित है।
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