युवाओं की बात सुनना और उन्हें समझना समय की जरुरत, Bhagwat बोले-जेन-जी और जेन-अल्फा हमारी पीढ़ी से भी ज्यादा ईमानदार
मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को नई पीढ़ी के प्रति भरोसा जताते हुए कहा कि जेन-जी और जेन अल्फा हमारी पीढ़ी से भी ज्यादा ईमानदार और देशभक्त हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की बात सुनना और उन्हें समझना समय की जरुरत है। यदि समय रहते संवाद हुआ होता तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन उस स्तर तक नहीं पहुंचता। भागवत ने मुंबई में एक कार्यक्रम में 11 से 19 साल आयु वर्ग के करीब दो हजार छात्रों से एक घंटे तक संवाद किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन तब जन्म लेते हैं, जब बातचीत के रास्ते बंद हो जाते हैं। यदि सरकार पहले ही संबंधित पक्षों से चर्चा कर ले, तो कई बार आंदोलन की जरुरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने आंदोलन को भी लोकतांत्रिक संवाद का एक जरिया बताया। भागवत ने कहा कि उनकी पीढ़ी बिना अधिक सवाल किए बड़ों की बात मान लेती थी, लेकिन आज की जेन-जी हर विषय पर सवाल पूछती है और तर्कपूर्ण उत्तर चाहती है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव नकारात्मक नहीं, बल्कि सकारात्मक है।
युवाओं को केवल उत्तर ही नहीं, बल्कि सम्मान और स्नेह भी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि युवाओं को आंदोलन नहीं करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि विरोध का स्वरूप लोकतांत्रिक और जिम्मेदार होना चाहिए। जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस लाठीचार्ज का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि किसी भी घटना पर निष्कर्ष निकालने से पहले उसके कारणों को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाचारों में कुछ उपद्रवियों के शामिल होने की बातें पढ़ने को मिली हैं, लेकिन यदि आंख मूंदकर किसी पर भरोसा करना हो तो वह नई पीढ़ी पर करेंगे। उनके मुताबिक यदि युवा आवाज उठा रहे हैं तो उसके पीछे कोई वास्तविक पीड़ा जरुर होगी और उसे समझना चाहिए।
भागवत ने कहा कि शिक्षा को व्यावसायिक कारोबार नहीं बनाया जाना चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और इसके लिए सरकार के साथ समाज की भी समान भागीदारी जरुरी है। उन्होंने भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि युद्ध के समय देश को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन संघर्ष समाप्त होने के बाद संवाद का मार्ग जरुर तलाशना चाहिए, क्योंकि स्थायी समाधान बातचीत से ही निकलता है। महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में महिलाओं को नेतृत्व और समान अवसर मिलना चाहिए। वहीं समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े सामाजिक परिवर्तन से पहले समाज को उसके लिए तैयार करना जरुरी होता है।
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