Dark Mode
  • Monday, 02 November 2026
वैज्ञानिकों ने सुलझाया Death Valley में पत्थरों के खिसकने का रहस्य

वैज्ञानिकों ने सुलझाया Death Valley में पत्थरों के खिसकने का रहस्य

न्यूयार्क। अमेरिका का डेथ वैली नेशनल पार्क का सूखा मैदान हैरतअंगेज प्राकृतिक घटना के लिए मशहूर है। कैलिफोर्निया स्थित इस नेशनल पार्क में विशाल पत्थर अपनी जगह से खिसकते हैं और पीछे मिट्टी पर लंबी-लंबी लकीरें छोड़ जाते हैं। बिना किसी बाहरी धक्के या इंसानी दखल के इन भारी पत्थरों का चलना लंबे समय से एक रहस्य बना हुआ था, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस पहेली को सुलझा लिया है। इसका जवाब किसी जादुई ताकत में नहीं, बल्कि पानी, बर्फ और हवा के एक अनोखे मेल में छिपा है। यह घटना पार्क के रेसट्रैक प्लाया नामक स्थान पर होती है, जो कभी एक झील का तल हुआ करता था। बारिश के बाद कभी-कभी यहां पानी जमा हो जाता है और सूखने पर इसकी ज़मीन सपाट और सख्त हो जाती है। इसी मैदान पर अलग-अलग आकार के भारी-भरकम पत्थर पड़े हैं, जिनके पीछे बनी लकीरें स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि वे अपनी जगह से काफी दूर तक खिसक चुके हैं। इस घटना को सेलिंग स्टोन या चलते हुए पत्थर के नाम से जाना जाता है। लंबे समय तक वैज्ञानिक यह सवाल सुलझाते रहे कि आखिर इतनी भारी चट्टानों को कौन सी ताकत आगे बढ़ाती है।
केवल हवा को इसका पूरा जवाब नहीं माना जा सकता था, क्योंकि सूखी और सख्त ज़मीन पर इतने भारी पत्थरों को खिसकाना लगभग असंभव प्रतीत होता है। इस रहस्य का खुलासा तब होता है जब मैदान में बारिश के बाद पानी जमा होता है। ठंडी रातों में, इस पानी की सतह पर बर्फ की एक पतली परत जम जाती है। तापमान बढ़ने पर यह बर्फ टूटकर बड़े-बड़े तैरते हुए टुकड़ों में बंट जाती है। इसके बाद हल्की हवा इन बर्फ के टुकड़ों को मैदान पर आगे धकेलती है। जब बर्फ के ये तैरते हुए टुकड़े पत्थरों से टकराते हैं, तो वे उन्हें गीली और नरम मिट्टी पर धीरे-धीरे खिसका सकते हैं। इस तरह हवा, पानी और बर्फ मिलकर वह काम कर देते हैं, जो सामान्य परिस्थितियों में लगभग असंभव लगता है। इस रहस्य की जांच के लिए वैज्ञानिकों ने पत्थरों की निगरानी की और जीपीएस तकनीक का उपयोग करके उनकी स्थिति में होने वाले बदलावों को दर्ज किया।
दिसंबर 2013 में, शोधकर्ताओं ने रेसट्रैक प्लाया में पत्थरों को वास्तव में खिसकते हुए अपनी आंखों से देखा। इस अध्ययन के नतीजे 2014 में प्रकाशित हुए, जिसमें पाया गया कि पत्थरों को चलाने के लिए किसी भीषण तूफान की आवश्यकता नहीं थी। बर्फ की पतली चादर, गीली ज़मीन और हल्की हवा का एक साथ मेल भी पत्थरों को आगे बढ़ा सकता है। एक घटना के दौरान कुछ पत्थर 60 मीटर से भी ज़्यादा खिसक गए। रेसट्रैक प्लाया में सभी पत्थर एक साथ नहीं खिसकते; उनकी गति ज़मीन में नमी की मात्रा, बर्फ के टुकड़ों के आकार, हवा की दिशा और पत्थरों की बनावट पर निर्भर करती है। अनुकूल मौसम मिलने पर ही कुछ पत्थर आगे बढ़ पाते हैं, जबकि दूसरे लंबे समय तक स्थिर रहते हैं। जब पानी सूख जाता है और मिट्टी दोबारा सख्त हो जाती है, तो पत्थरों के पीछे बनी ये लंबी लकीरें मैदान पर रह जाती हैं, जो इस प्राकृतिक घटना की गवाह बनती हैं।

Comment / Reply From

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!