पूरी जिंदगी में कभी पानी नहीं पीता है Kangaroo Rat
फ्लोरिडा। उत्तरी अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी रेगिस्तानों में पाया जाने वाला कंगारू चूहा अपनी पूरी जिंदगी में कभी पानी नहीं पीता। यह चूहा बगैर पानी के स्वस्थ जीवन जीता है। इस जीव का नाम कंगारू चूहा इसकी टांगों और पूंछ के कारण पड़ा है, जो ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले कंगारू से मिलती-जुलती हैं। इसकी एक और खासियत इसके गालों के बाहर की तरफ बनी थैलियां हैं, जिनमें यह खाने का सामान भरकर अपने बिलों में जमा करता है। अपनी लंबी छलांगों के कारण भी यह कंगारू से मेल खाता है, जो रेगिस्तान में उगने वाले कैक्टस के पौधों को आसानी से कूदकर पार कर जाता है। कंगारू चूहा रेगिस्तानी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह अपनी तेज गति के लिए जाना जाता है, एक सेकंड में लगभग छह मीटर की दूरी तय कर सकता है। यह तीव्र गति रेगिस्तान में दूसरे जीवों से खुद को बचाने में इसकी सबसे बड़ी मदद करती है, क्योंकि इसके शरीर में पानी की मात्रा अधिक होने के कारण यह कई शिकारियों का पसंदीदा भोजन हो सकता है। इसकी लंबी पूंछ भी बेहद उपयोगी है; छलांग लगाते समय यह पतवार की तरह काम करती है, जिससे कंगारू चूहा हवा में ही अपनी दिशा बदलने में सक्षम होता है।
इसकी कुल लंबाई पूंछ सहित 38 सेंटीमीटर तक होती है, जिसमें से इसकी पूंछ ही लगभग 20 सेंटीमीटर लंबी होती है। इसके आगे के पैर छोटे होते हैं, जबकि सिर बड़ा और आंखें छोटी होती हैं। इनके शरीर के ऊपरी हिस्से के बाल पीले या भूरे रंग के होते हैं, और नीचे का हिस्सा सफेद होता है। कंगारू चूहे के पैर शरीर के अन्य अंगों के अनुपात में कहीं ज्यादा बड़े होते हैं, जो इसे लंबी और सटीक छलांग लगाने में मदद करते हैं। इनकी छलांगें इतनी सटीक होती हैं कि ये कैक्टस को पार करके वहां बैठे टिड्डों पर भी सीधे गिर सकते हैं। जब दो कंगारू चूहे आपस में लड़ते हैं, तो ऐसा लगता है मानो वे छोटी-छोटी लाठियों से लड़ रहे हों। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यह जीव आखिर बिना पानी पिए जीवन भर कैसे जीवित रहता है। दरअसल, कंगारू चूहे को पानी की बहुत कम आवश्यकता होती है। यह अपनी पानी की जरूरत को रेगिस्तान में उगने वाले पेड़-पौधों की जड़ों को खाकर पूरी करता है, क्योंकि इन जड़ों में कुछ न कुछ नमी अवश्य होती है।
इसका गुर्दा (किडनी) अत्यंत मजबूत और कार्यकुशल होता है, जो इस थोड़ी सी नमी से ही शरीर की पानी की पूरी आवश्यकता को पूरा कर लेता है। पानी की यही नमी इसको जिंदा रखने के लिए पर्याप्त है, और इन्हीं जड़ों से इसे भोजन भी मिलता रहता है। यह अपने आप में प्रकृति के अद्भुत अनुकूलन और जीवन के संतुलन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। बता दें कि विज्ञान ने भले ही अनेक क्षेत्रों में तरक्की कर ली हो, लेकिन प्रकृति के रहस्यों का पता लगाना या उनके कारणों को समझ पाना अब भी इंसान के बस की बात नहीं है। ऐसे ही कुछ जीते-जागे चमत्कार कभी-कभी सामने आ जाते हैं, जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है।
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