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  • Thursday, 06 August 2026
यात्री विमान से भिड़ते-भिड़ते बचा ट्रंप का Helicopter, अमेरिकी राष्ट्रपति की हवाई सुरक्षा पर उठे सवाल

यात्री विमान से भिड़ते-भिड़ते बचा ट्रंप का Helicopter, अमेरिकी राष्ट्रपति की हवाई सुरक्षा पर उठे सवाल

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हेलीकॉप्टर मरीन वन और एक यात्री विमान के बीच मंगलवार को टक्कर जैसी स्थिति बन गई। दोनों विमान बेहद करीब आ गए, जिसके बाद हवाई सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार दोनों विमान सुरक्षित रहे और राष्ट्रपति ट्रंप को कोई खतरा नहीं पहुंचा। अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) के मुताबिक, रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट के पास मरीन वन और एक कमर्शियल विमान के बीच कुछ समय के लिए तय न्यूनतम दूरी का पालन नहीं हुआ। शुरुआती जांच में इसे लॉस ऑफ सेपरेशन की स्थिति बताया गया है। इसके बाद दोनों विमानों को अलग-अलग दिशा में भेज दिया गया।


यह घटना इसलिए ज्यादा गंभीर मानी जा रही है क्योंकि जनवरी 2025 में इसी एयरपोर्ट के पास एक सैन्य हेलीकॉप्टर और यात्री विमान की टक्कर में 67 लोगों की मौत हो चुकी है। उस हादसे के बाद रीगन एयरपोर्ट क्षेत्र में हेलीकॉप्टर और यात्री विमानों की आवाजाही को लेकर कई नए सुरक्षा नियम लागू किए गए थे। अब सवाल उठ रहे हैं कि सख्त नियमों के बावजूद ऐसी स्थिति दोबारा कैसे बनी। हवाई सुरक्षा नियमों के अनुसार, एयरपोर्ट क्षेत्र में दो विमानों के बीच न्यूनतम दूरी बनाए रखना जरूरी होता है। इस घटना में करीब 1.5 मील की क्षैतिज दूरी और 500 फीट की ऊंचाई का अंतर बनाए रखने के मानक पर सवाल उठे हैं। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मरीन वन ने व्हाइट हाउस से उड़ान भरी थी। सामान्य प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति के हेलीकॉप्टर के उड़ान भरने से पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचना दी जाती है, ताकि आसपास की कमर्शियल उड़ानों को नियंत्रित किया जा सके। लेकिन इस बार तय प्रक्रिया के पालन को लेकर जांच की जा रही है।


बताया गया कि एक यात्री विमान उड़ान भर चुका था और उसी दौरान मरीन वन उसके करीब पहुंच गया। इसके अलावा, एक अन्य क्षेत्रीय उड़ान पर भी असर पड़ा, जिसे एहतियात के तौर पर अपना रास्ता बदलना पड़ा और बाद में सुरक्षित उतारा गया। इस घटना ने न केवल आम हवाई सुरक्षा बल्कि राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होता है, ऐसे में किसी भी तरह की चूक को गंभीर माना जाता है। एफएए ने मामले की सुरक्षा समीक्षा शुरू कर दी है, जबकि राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड भी जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोलर दोनों विमानों के पायलटों के संपर्क में थे। अब जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि नियमों के बावजूद यह स्थिति क्यों बनी।

 

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