Dark Mode
  • Wednesday, 11 February 2026
China ने ट्रंप की एक नहीं सुनी- लोकतंत्र समर्थक जिमी लाई को 20 साल की जेल

China ने ट्रंप की एक नहीं सुनी- लोकतंत्र समर्थक जिमी लाई को 20 साल की जेल

हांगकांग। लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के प्रमुख चेहरे और पूर्व मीडिया टायकून जिमी लाई को अदालत ने 20 साल की जेल की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही उस लंबी कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है, जो बीते कई वर्षों से हांगकांग की बदलती राजनीतिक तस्वीर और चीन के सख्त होते रुख का प्रतीक बनी हुई थी। 78 वर्षीय जिमी लाई उन सबसे प्रखर आलोचकों में शामिल थे, जिन्हें चीन द्वारा 2020 में लागू किए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निशाना बनाया गया। अदालत ने उन्हें दो राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों और एक देशद्रोह के आरोप में दोषी करार दिया। जिमी लाई ने अदालत का फैसला बेहद शांति और चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ सुना। सजा के दौरान वह सफेद जैकेट में नजर आए और शारीरिक रूप से पहले के मुकाबले काफी दुबले दिखे। फैसला सुनने के बाद उन्होंने कोर्ट रूम में मौजूद लोगों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया। 20 साल की इस लंबी सजा का अर्थ यह है कि जिमी लाई को पैरोल मिलने की संभावना तब बनेगी, जब उनकी उम्र 90 वर्ष के पार हो चुकी होगी। जिमी लाई के साथ उनके पूर्व मीडिया संस्थान से जुड़े छह अन्य सहयोगियों को भी जेल भेजा गया है, जिन्हें 6 साल 9 महीने से लेकर 10 साल तक की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा, उनसे जुड़ी कंपनियों पर करीब 7.6 लाख अमेरिकी डॉलर का भारी जुर्माना भी लगाया गया है। लाई का अखबार एपल डेली हांगकांग में लोकतंत्र की आवाज माना जाता था। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू होने और संपत्तियां फ्रीज होने के बाद इस मुखर टैब्लॉयड को बंद करना पड़ा था। इस सजा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस और कूटनीतिक तनाव को जन्म दे दिया है।

अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने इस मामले पर पहले ही कड़ी आपत्ति जताई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी जिमी लाई की रिहाई की वकालत कर चुके हैं। समर्थकों को उम्मीद है कि आगामी अंतरराष्ट्रीय दौरों के दौरान इस मुद्दे को फिर से प्रमुखता से उठाया जाएगा। दूसरी ओर, चीन और हांगकांग प्रशासन इन आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि यह मामला प्रेस की आजादी पर हमला नहीं बल्कि कानून का पालन है। उनका दावा है कि 2019 के हिंसक प्रदर्शनों के बाद शहर में स्थिरता बहाल करने के लिए ऐसी सख्ती अनिवार्य थी। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस कानून के बाद हांगकांग की शोरगुल भरी राजनीति लगभग खामोश हो गई है और दर्जनों सक्रिय कार्यकर्ता सलाखों के पीछे हैं। अदालत के बाहर जिमी लाई के समर्थकों का भारी जमावड़ा देखा गया। कई बुजुर्ग समर्थक कड़ाके की ठंड में भी उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों कतार में खड़े रहे। एक समर्थक ने भावुक होते हुए कहा कि लाई हांगकांग की आजादी और न्याय की सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं। समर्थकों के बीच अब उन्हें और उनके साथियों को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की मांग भी जोर पकड़ रही है। यह फैसला न केवल एक व्यक्ति की सजा है, बल्कि हांगकांग के भविष्य और वहां की नागरिक स्वतंत्रता पर एक बड़ा सवालिया निशान भी है।

Comment / Reply From

You May Also Like

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!