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  • Wednesday, 11 February 2026
Nuclear Policy पर ईरान ने कहा- वो कौन होते हैं हमे हुक्म देने वाले, हम उनसे डरने वाले नहीं

Nuclear Policy पर ईरान ने कहा- वो कौन होते हैं हमे हुक्म देने वाले, हम उनसे डरने वाले नहीं

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच तेहरान ने अपने इरादे पूरी तरह स्पष्ट कर दिए हैं। ईरान ने घोषणा की है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य हमलों के खतरे और नए आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को बंद नहीं करेगा। रविवार को तेहरान में आयोजित एक सार्वजनिक मंच पर बोलते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ तौर पर कहा कि ईरान दबाव की राजनीति में झुकने वाला देश नहीं है और कोई भी बाहरी शक्ति उस पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकती। ईरानी विदेश मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की उपस्थिति में परमाणु नीति पर देश का पक्ष रखा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरेनियम संवर्धन तेहरान के लिए एक ऐसा मुद्दा है जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, हम संवर्धन जारी रखने पर इतना बल इसलिए देते हैं क्योंकि यह हमारा संप्रभु अधिकार है। चाहे हम पर युद्ध ही क्यों न थोप दिया जाए, हम इसे नहीं छोड़ेंगे क्योंकि किसी को भी ईरान पर हुक्म चलाने का अधिकार नहीं है। अराघची ने मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) क्षेत्र में अमेरिकी सेना की बढ़ती तैनाती को दबाव की खराब रणनीति करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से ईरान डरने वाला नहीं है।

बातचीत की संभावनाओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिका पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। उनके अनुसार, अमेरिका की ओर से कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जो गंभीरता दर्शाते हैं, लेकिन साथ ही प्रतिबंधों का जारी रहना और सैन्य गतिविधियां उसकी मंशा पर गंभीर संदेह पैदा करती हैं। समझौते की संभावनाओं को लेकर ईरान ने अपनी शर्तें भी सामने रखी हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता में कोई समस्या नहीं है, लेकिन असली बाधा अमेरिका की अत्यधिक और अवास्तविक मांगें हैं। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका का दृष्टिकोण सम्मानजनक, निष्पक्ष और आपसी हितों की रक्षा पर आधारित रहता है, तभी किसी सार्थक समझौते पर पहुंचना संभव होगा। ईरान की इस सख्त प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन के लिए आने वाले समय में ईरान के साथ कूटनीतिक राह आसान नहीं रहने वाली है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय और अधिक गहराता नजर आ रहा है।

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