Dark Mode
  • Monday, 26 January 2026
Donald Trump ने जेपीमॉर्गन चेज़ और सीईओ जेमी डिमोन पर ठोका 5 अरब डॉलर का मुकदमा

Donald Trump ने जेपीमॉर्गन चेज़ और सीईओ जेमी डिमोन पर ठोका 5 अरब डॉलर का मुकदमा

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बैंकिंग क्षेत्र के दिग्गज संस्थान जेपीमॉर्गन चेज़ और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेमी डिमोन के खिलाफ एक बड़ा कानूनी मोर्चा खोल दिया है। ट्रंप ने फ्लोरिडा की एक अदालत में बैंक के खिलाफ मुकदमा दायर करते हुए 5 अरब डॉलर (लगभग 41,500 करोड़ रुपये) के हर्जाने की मांग की है। ट्रंप का आरोप है कि बैंक ने साल 2021 में राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से उनके और उनकी कंपनियों के बैंक खाते बंद कर दिए थे। यह कानूनी कार्रवाई ट्रंप द्वारा अपने विरोधियों और आलोचकों के खिलाफ शुरू की गई मुकदमों की श्रृंखला का ताजा हिस्सा मानी जा रही है। मुकदमे के विवरण के अनुसार, फरवरी 2021 में जेपीमॉर्गन ने ट्रंप और उनके व्यवसायों को सूचित किया था कि उनके सभी वेल्थ मैनेजमेंट और व्यावसायिक खाते बंद किए जा रहे हैं। इसके लिए बैंक ने 60 दिनों का नोटिस दिया था। ट्रंप का दावा है कि उन्हें और उनके परिवार को पूरी तरह से ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया गया था, जिसकी अनुमति स्वयं जेमी डिमोन ने दी थी। ट्रंप का तर्क है कि इस कार्रवाई के कारण अन्य वित्तीय संस्थानों ने भी उनके साथ कारोबार करने से दूरी बना ली, जिससे उन्हें भारी व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ा। मुकदमे में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रंप ने इस विषय पर सीधे डिमोन से संपर्क किया था, जिन्होंने समाधान का भरोसा तो दिया लेकिन बाद में कोई संवाद नहीं किया। यह मुकदमा ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन और प्रमुख वित्तीय संस्थानों के बीच तनाव चरम पर है। हाल ही में जेमी डिमोन ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ट्रंप के उस प्रस्ताव की आलोचना की थी, जिसमें क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर 10 प्रतिशत की सीमा लगाने की बात कही गई थी।

डिमोन ने इसे “आर्थिक आपदा” करार दिया था, जिसके ठीक एक दिन बाद यह मुकदमा दायर किया गया। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी न्याय विभाग ने फेडरल रिजर्व मुख्यालय के नवीनीकरण प्रोजेक्ट में कथित गड़बड़ी को लेकर आपराधिक जांच शुरू कर दी है, जिसे फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, जेपीमॉर्गन चेज़ ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बैंक की प्रवक्ता ट्रिश वेक्सलर ने एक आधिकारिक बयान में मुकदमे को पूरी तरह से निराधार बताया और कहा कि बैंक अदालत में मजबूती से अपना बचाव करेगा। बैंक का स्पष्ट कहना है कि वे राजनीतिक या धार्मिक आधार पर कभी भी खाते बंद नहीं करते हैं। बैंक के अनुसार, खाते बंद करने का निर्णय केवल तब लिया जाता है जब कोई ग्राहक संस्थान के लिए ‘नियामकीय जोखिम’ पैदा करता है। बैंक ने संकेत दिया कि वे वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा के लिए बनाए गए कड़े नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। गौरतलब है कि ट्रंप लंबे समय से बड़े बैंकों पर रूढ़िवादी विचारधारा वाले लोगों को निशाना बनाने या ‘डी-बैंकिंग’ करने का आरोप लगाते रहे हैं। अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही उन्होंने कई बैंक प्रमुखों को चेतावनी दी थी कि राजनीतिक विचारों के आधार पर सेवाएं बंद करना नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है। अगस्त 2025 में ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर भी हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य उन बैंकों को दंडित करना है जो ग्राहकों के राजनीतिक विचारों के आधार पर भेदभाव करते हैं। फिलहाल, जेपीमॉर्गन के खिलाफ यह कानूनी लड़ाई अमेरिकी कॉर्पोरेट और राजनीतिक जगत के बीच बढ़ते टकराव का एक नया केंद्र बन गई है।

Comment / Reply From

You May Also Like

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!