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  • Monday, 26 January 2026
ट्रंप की नाराजगी के चलते बगैर पैसे चुकाए अमेरिका ने खुद को WHO से किया अलग

ट्रंप की नाराजगी के चलते बगैर पैसे चुकाए अमेरिका ने खुद को WHO से किया अलग

वॉशिंगटन। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी छवि खराब करने में राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंनें डब्ल्यूएचओ जैसी महत्वपूर्ण संस्था से खुद को अलग कर लिया है। झंडा उतार दिया है और कहा है कि अमेरिकी हितों को अनदेखा किया गया है इसलिए यह निर्णय लिया गया है। इससे भी बड़ी बात ये हैं कि अमेरिका ने बगैर हिसाब पूरा किए खुद को अलग किया है। इससे उनके अपने ही लोग पर सवाल उठा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार डब्ल्यूएचओ से बाहर निकलने के लिए एक साल का नोटिस देना और बकाया राशि चुकाना जरूरी होता है। अमेरिका ने एक साल का नोटिस दिया था, लेकिन अभी भी उस पर 270 मिलियन डॉलर से ज्यादा बकाया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि डब्ल्यूएचओ के संविधान के तहत अमेरिका पर यह राशि चुकाने की बाध्यता नहीं बनती। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि अमेरिका के इस फैसले पर फरवरी में होने वाली कार्यकारी बोर्ड बैठक में चर्चा होगी और उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। हालांकि, इस फैसले पर अमेरिका के भीतर ही कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डब्ल्यूएचओ छोड़ना अमेरिका के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक संक्रामक रोग विशेषज्ञों की संस्था के अध्यक्ष रोनाल्ड नहास ने कहा कि यह फैसला दूरदर्शिता से खाली और गलत दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि बीमारियां सीमाएं नहीं देखतीं। वैश्विक सहयोग ही नागरिकों को सुरक्षित रखने का रास्ता है। डब्ल्यूएचओ से बाहर निकलने से अमेरिका को इबोला जैसी उभरती बीमारियों और हर साल फैलने वाले फ्लू पर नजर रखने में परेशानी होगी। इससे यह भी प्रभावित होगा कि अमेरिका सही वैक्सीन स्ट्रेन चुन पाएगा या नहीं।

नहास ने साफ कहा कि डब्ल्यूएचओ छोड़ना वैज्ञानिक रूप से लापरवाही है। यह संक्रमण रोगों की बुनियादी प्रकृति को नजरअंदाज करता है। वैश्विक सहयोग कोई लग्जरी नहीं, बल्कि जैविक जरूरत है। सरकार का जवाब है कि अमेरिका वैश्विक स्वास्थ्य में अपनी भूमिका बनाए रखेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि उसके दो हजार से ज्यादा कर्मचारी 63 देशों में काम कर रहे हैं और सैकड़ों देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते हैं। सरकार का दावा है कि निगरानी, जांच और महामारी प्रतिक्रिया के लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार को जिनेवा में डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी झंडा हटा दिया गया था। यह फैसला अमेरिका के स्वास्थ्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने मिलकर घोषित किया। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि डब्ल्यूएचओ अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है और कई बार अमेरिका के हितों के खिलाफ काम करता रहा है। डब्ल्यूएचओ से नाराज थे ट्रंप सरकार का आरोप है कि कोविड महामारी के दौरान डब्ल्यूएचओ ने समय पर वैश्विक आपात स्थिति घोषित नहीं की और अमेरिका के शुरुआती फैसलों पर अनुचित आलोचना की। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि जब अमेरिका ने कुछ देशों से यात्रा पर रोक लगाई, तो डब्ल्यूएचओ ने उस पर सवाल खड़े किए। इसके अलावा सरकार ने यह भी कहा कि अमेरिका डब्ल्यूएचओ को सबसे ज्यादा पैसा देता रहा है, लेकिन फिर भी न तो संगठन में अमेरिका को बराबरी का दर्जा मिला और न ही कभी कोई अमेरिकी महानिदेशक बना।

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