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  • Thursday, 12 February 2026
विलियम लाई के अमेरिका जाने पर भड़का China , 25 लड़ाकू विमान पहुंचे खाड़ी पार

विलियम लाई के अमेरिका जाने पर भड़का China , 25 लड़ाकू विमान पहुंचे खाड़ी पार

ताइपे। ताइवान के उपराष्ट्रपति विलियम लाई के हालिया अमेरिका दौरे से चीन भड़क उठा है। उसने अपने 25 लड़ाकू ‎विमानों को खाड़ी पार करा ‎दिया है। इसे धमकी के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार रविवार को ताइवानी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि चीन के 25 प्लेन ताइवान की खाड़ी को पार कर उसके क्षेत्र में घुस आए। रक्षा मंत्रालय की ओर से शेयर किए गए नक्शे के मुताबिक चीन के एसयू-30 और जे-11 लड़ाकू विमानों ने उसके इलाके में उड़ान भरी। इसे ताइवान के लिए चीन की और से दी गई धमकी बताया जा रहा है। गौरतलब है ‎कि अकसर चीन ताइवान पर अपना हक जताता रहा है और उसे वन चाइना पॉलिसी के तहत अपना हिस्सा बताता है। रिपोर्ट के मुताबिक यह नया विवाद ताइवान के उपराष्ट्रपति विलियम लाई के हालिया अमेरिका दौरे को लेकर शुरू हुआ है। विलियम लाई ताइवान के राष्ट्रपति बनने की रेस में हैं और सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।

ऐसे में उनकी अमेरिका यात्रा से चीन बौखला गया है। एक मी‎डिया रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सेना ने यह ड्रिल इसलिए की है ताकि यह दिखाया जा सके कि वह ताइवान के आसमान और समुद्र क्षेत्र को सीज कर सकती है। ताइवान की अकसर नाकेबंदी करने की कोशिश चीनी सेना करती है। कुछ महीने पहले भी उसने कई दिनों तक मिसाइलों और भारी हथियारों के साथ ताइवान की खाड़ी के पास युद्धाभ्यास किया था। तब अमेरिकी नेता नैन्सी पेलोसी ताइवान पहुंची थीं और चीन ने देख लेने तक की धमकी दी थी। उसके बाद काफी दिनों तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा था।

इस बार फिर चीन ने ऐसी ही हिमाकत की है, जिस पर ताइवान भी भड़क गया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि हम भी इस पर ऐक्शन लेंगे और फोर्स को तैनात करेंगे। इस बीच विलियम लाई ने कहा है कि आखिर ताइवान में चुनाव का फैसला करने वाला चीन कौन होता है। उन्होने टेलीविजन पर प्रसारित एक भाषण में कहा कि यह तो तानाशाही बनाम लोकतंत्र का चुनाव है। उन्होंने कहा कि आखिर ताइवान के नेताओं की यात्राओं से चीन को इतनी परेशानी क्यों होती है। उन्होंने दोटूक कहा, मेरा साफ स्टैंड है कि ताइवान चीन का हिस्सा नहीं है। हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बात करना चाहते हैं। उससे जुड़ना चाहते हैं। सुरक्षा की शर्त के साथ हम चीन से भी जुड़ने के लिए तैयार हैं। इस बीच अमेरिका ने भी चीन को नसीहत दी है कि वह दबाव बनाने की बजाय बातचीत करे।

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