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  • Wednesday, 11 February 2026
क्या दूसरी आजादी का सपना होगा पूरा? Sheikh Hasina के निर्वासन के बाद सबसे बड़े चुनाव पर सभी की नजर

क्या दूसरी आजादी का सपना होगा पूरा? Sheikh Hasina के निर्वासन के बाद सबसे बड़े चुनाव पर सभी की नजर

ढाका। बांग्लादेश अपने स्वतंत्रता काल के बाद से सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में से एक के लिए बस कुछ दिन शेष है, क्योंकि देश अपने अगले प्रधानमंत्री और सरकार के चयन के लिए मतदान करने को तैयार है। यह मतदान अगस्त 2024 के जन विद्रोह की पृष्ठभूमि में हो रहा है। जिसके परिणामस्वरूप करीब डेढ़ दशक के शासन के बाद हसीना की सरकार का नाटकीय रूप से पतन हुआ और एक अंतरिम प्रशासन का गठन हुआ। इस आंदोलन ने बांग्लादेश को मौलिक रूप से नया आकार दिया है, जिससे शासन, जवाबदेही और लोकतांत्रिक वैधता के बारे में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बांग्लादेश निर्वाचन आयोग ने 12 फरवरी, 2026 (गुरुवार) को मतदान दिवस के रूप में पुष्टि की है। नामांकन प्रक्रिया औपचारिक रूप से 29 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई, जिसके बाद 22 जनवरी, 2026 को आधिकारिक तौर पर प्रचार अभियान शुरू हुआ। चुनावी कानून के अनुसार, सभी राजनीतिक प्रचार अभियान 10 फरवरी को शाम 4:30 बजे तक समाप्त होने चाहिए, जिससे मतदान से पहले 48 घंटे का शांति काल (कूलिंग-ऑफ पीरियड) सुनिश्चित हो सके। बांग्लादेश का चुनाव अब सत्ता में परिवर्तन से ज्यादा क्षेत्रीय संतुलन का जरिया बनता दिख रहा है। चुनावी प्रक्रिया में अमेरिका और तुर्किये की दखलंदाजी की खबरों के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान के खिलाफ साजिश की आशंका जाहिर की है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी के 65 उम्मीदवारों के नामांकन लोन डिफॉल्ट और दोहरी नागरिकता के आधार पर खारिज करने की तैयारी है। ऐसा होने पर चुनाव एकतरफा हो जाएगा। बीएनपी के आरोप उस वक्त में सामने आए हैं, जब हाल ही खुलासा हुआ है कि अमेरिका जमात-ए-इस्लामी को चुनाव में जिताने की कोशिश में है। अमेरिकी विदेश विभाग दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय संतुलन के लिए जमात को उदार इस्लामी पार्टी मानकर मदद कर रहा है। इस बीच, बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के बेटे और अवामी लीग के नेता साजिब वाजेद जॉय सोमवार को कोलकाता में एक रैली को संबोधित करने वाले है। बीएनपी देशभर में लोकप्रियता के बावजूद चुनावी दौड़ में पिछड़ती दिख रही है। बीएनपी की चुनावी तैयारियों को पार्टी प्रमुख खालिदा जिया के निधन से भी बड़ा झटका लगा है। इससे पार्टी की जमीनी गतिविधियां प्रभावित हुई। बीएनपी ने सबसे ज्यादा 288 तारिक रहमान उम्मीदवार उतारे हैं, जिसमें से 4 की उम्मीदवारी रद्द हो चुकी है। 78 सीटों पर बागी उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जिनमें से 46 को स्थानीय कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है।

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